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Biographyव्यंग्य ना तो संस्कारी होते हैं ना दरबारी। टेढ़ापन ही व्यंग्य का असली संस्कार है। राकेश कायस्थ मौजूदा पीढ़ी के उन चंद लेखकों में शामिल हैं, जो व्यंग्य की ताकत और व्यंग्यकार होने की जिम्मेदारी को ठीक से समझते हैं। समय, समाज और सत्ता की विसंगतियों को देखने जो लेंस इनके पास है, वह विरल है। 201..
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Rambhakt Rangbaaz by Rakesh Kayasth..
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